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Business Idea: अश्वगंधा की खेती में हो जाएंगे मालामाल, फल से लेकर पत्ती तक बिक जाएगा

Business Idea: अश्वगंधा की खेती से Farmers की आज मोटी कमाई हो रही है. Uttar Pradesh and Bihar जैसे राज्यों में अश्वगंधा की सबसे ज्यादा खेती होती है.

अश्वगंधा के फल, बीज और छाल का प्रयोग कर कई प्रकार की दवाइयां बनाई जाती हैं.

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इसमे लागत से कई गुना अधिक कमाई होने के कारण इसे कैश क्रॉप भी कहा जाता है.

आज कल खेती किसानी सिर्फ जीविका चलाने का एक जरिया भर नहीं रह गया है.

बहुत से पढ़े लिखे लोग खेती की ओर रूख कर रहे हैं और साथ ही बंपर कमाई भी कर रहे हैं.

अब आज कल Farmers of India भी परंपरागत फसलों को छोड़कर नकदी और Medicinal Plant की खेती कर रहे हैं.

इससे उन्हें अपनी आमदनी बढ़ाने में भी काफी मदद मिल रही है. यदि आप भी कोई बंपर कमाई वाली फसल उगाना चाहते हैं तो

आज हम आपको एक ऐसी फसल के बारे में बता रहे हैं. जिसमें लागत से कई गुना अधिक मुनाफा घर बैठे कमा सकते हैं.

आज हम आपको अश्वगंधा की खेती (Ashwagandha Farming) के बारे में बता रहे हैं

अश्वगंधा(Ashwagandha) की खेती से किसान कम समय में अधिक मुनाफा कमा कर मालामाल हो सकते हैं.

भारत में अश्वगंधा की खेती Haryana, Rajasthan, Maharashtra, Uttar Pradesh, Gujarat, Punjab, Kerala, Andhra Pradesh and Jammu Kashmir में की जा रही है

इसकी खेती खारे पानी में भी की जा सकती है. इसकी खेती September October महीने में की जाती है.

आपको अच्छी फसल के लिए जमीन में नमी और मौसम शुष्क होना चाहिए. रबी के मौसम में अगर बारिश हो जाए तो फसल बेहतर हो जाती है.

जुताई के समय ही खेत में जैविक खाद डाल दी जाती है. बुवाई के लिए 10-12 किलो बीज प्रति Hectares पर्याप्त होता है.

साथ ही 7-8 दिनों में बीज अंकुरित हो जाते हैं. इसकी खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी और लाल मिट्टी अच्छी मानी गई है.

जिस मिट्टी का PH मान 7.5 से 8 के बीच रहे, उसमें पैदावार ” अच्छी रहती है.

पौधों के अच्छे विकास के लिए 20-35 डिग्री तापमान और 500 से 750 MM वर्षा बेहद जरूरी है. अश्वगंधा(Ashwagandha) के पौधे की कटाई January से लेकर मार्च तक की जाती है.

धान-गेहूं से अधिक कमाई

आपको बता दे कि सभी जड़ी बूटियों में सबसे अधिक प्रसिद्ध अश्वगंधा(Ashwagandha) ही है.

तनाव और चिंता को दूर करने में अश्वगंधा को सबसे फायदेमंद माना जाता है.

अश्वगंधा(Ashwagandha) के कई तरह के इस्तेमाल के कारण इसकी मांग हमेशा बनी रहती है.

अश्वगंधा(Ashwagandha) के फल, बीज और छाल का प्रयोग कर कई प्रकार की दवाइयां भी बनाई जाती हैं.

इसकी खेती कर किसान धान, गेहूं और मक्का की खेती के मुकाबले 50 फीसदी तक अधिक मुनाफा कमा सकते हैं.

यही वजह है कि Bihar and Uttar Pradesh जैसे राज्यों के किसान भी बड़े पैमाने पर अश्वगंधा की खेती कर रहे हैं.

अश्वगंधा की जड़ से घोड़े की तरह इसमे गंध आती है, जिस कारण से इसे अश्वगंधा कहते है. अश्वगंधा(Ashwagandha) एक औषधिय फसल है.

यह एक झाड़ीनुमा पौधा होता है। लागत से कई गुना मुनाफा हासिल होने के कारण इसे Cash Crop भी कहते हैं.

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